“आओ बिहार”: औद्योगिक विकास और शैक्षणिक संस्थानों में निवेश की राह

बिहार सरकार ने राज्य में निवेश को बढ़ावा देने, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों के विकास के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी योजना “आओ बिहार” शुरू की है।

राज्य में उद्योग और संस्थानों को जमीन उपलब्ध कराने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए सरकार ने इस योजना के तहत एक पारदर्शी व्यवस्था लागू की है, जिसमें आम नागरिक भी सीधे तौर पर राज्य के विकास में भागीदारी कर सकते हैं।

योजना की प्रमुख विशेषताएँ:

जमीन पंजीकरण: कोई भी व्यक्ति अथवा व्यक्ति समूह जिसके पास दो एकड़ या उससे अधिक जमीन है, वह अपने जिले के जिलाधिकारी (DM) के पास जमीन का विवरण दर्ज करा सकता है।

जमीन का मूल्य निर्धारण: जमीन मालिक को अपनी जमीन की विक्रय दर (Selling Price) बतानी होगी और इसके साथ एक अंडरटेकिंग देनी होगी कि यह दर निबंधन तिथि से एक निश्चित अवधि तक मान्य रहेगी।

जांच प्रक्रिया: जिला प्रशासन जमीन की मालिकाना हक और विवाद मुक्त स्थिति की जांच करेगा, उसके बाद ही भूमि को सूचीबद्ध किया जाएगा।

बियाडा की भूमिका: सूचीबद्ध होने के बाद जमीन की जानकारी बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) को भेजी जाएगी और वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।

निवेशकों को सूचना: राज्य सरकार विज्ञापनों के माध्यम से निवेशकों को बताएगी कि कौन-कौन सी जमीन बिक्री के लिए उपलब्ध है। इच्छुक निवेशक सीधे जमीन मालिक से संपर्क कर सकते हैं।

विशेष प्रोत्साहन: यदि निवेशक इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत जमीन पर निवेश करते हैं तो उन्हें स्टांप शुल्क एवं निबंधन शुल्क में 100% की छूट मिलेगी। साथ ही बिहार की औद्योगिक नीति में बताए गए अन्य लाभ भी मिलेंगे।

यह योजना जहां एक ओर उद्योगों और संस्थानों को आसान तरीके से जमीन उपलब्ध कराने में मदद करेगी, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को भी राज्य के आर्थिक विकास में भागीदारी का अवसर प्रदान करेगी।

अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति उद्योग विभाग, सचिवालय, पटना अथवा बियाडा के सचिव से संपर्क कर सकते हैं।


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