जितिया पर्व और मरूआ आटे का महत्व: सेहत और स्वाद का अनोखा संगम

आने वाले दिनों में बिहार और पूर्वांचल के घर-घर में जितिया का त्योहार मनाया जाएगा। इस पर्व का एक अहम हिस्सा है “नहाए-खाए”, जिसमें खासतौर पर मरूआ आटे (रागी) की रोटी बनाई जाती है। परंपरा के साथ-साथ यह आटा सेहत के लिए भी वरदान है।

मरूआ आटे के अद्भुत फायदे
मरूआ आटा केवल त्योहार तक सीमित न रखकर रोज़ाना भोजन का हिस्सा बनना चाहिए। इसमें मौजूद कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट शरीर को मजबूत और ऊर्जावान बनाते हैं। इसके फायदे—

वजन घटाने में सहायक

हड्डियों को मजबूत करने में कारगर

एनीमिया को दूर करने में लाभकारी

डायबिटीज नियंत्रित रखने में सहायक

पाचन सुधारने और तनाव कम करने में मददगार

ग्लूटेन-फ्री होने से लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है


मरूआ आटे से बनने वाले स्वादिष्ट व्यंजन


मरूआ इडली – इडली के बैटर में थोड़ा मरूआ आटा मिलाकर बनाई गई इडली न सिर्फ टेस्टी होती है बल्कि सेहत से भरपूर भी।



मरूआ अप्पे – दक्षिण भारतीय व्यंजन अप्पे में सूजी और सब्जियों के साथ मरूआ आटा मिलाकर पौष्टिकता दोगुनी करें।



रागी दूध – रागी के दानों को रातभर भिगोकर सुबह पीसकर उसका दूध निकालें। यह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है।

निष्कर्ष
जितिया पर्व के मौके पर मरूआ आटे का महत्व और बढ़ जाता है। लेकिन इसे सिर्फ त्योहार तक सीमित न करें। सप्ताह में कम से कम 3 दिन इसका सेवन करके आप अपनी सेहत को बेहतर और जीवन को ऊर्जावान बना सकते हैं।


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