भारत की दृढ़ और दूरदर्शी विदेश नीति अब ठोस परिणाम देने लगी है। ऑस्ट्रेलिया से लेकर जापान तक, भारत ने विश्व मंच पर अपनी स्थिति को मज़बूती से स्थापित किया है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत को एक भरोसेमंद और तेज़ी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में देखने लगा है।
जापान ने भारत में निवेश लक्ष्य किया दोगुना
जापान ने भारत में अपने निवेश को 5 ट्रिलियन येन से बढ़ाकर 10 ट्रिलियन येन कर दिया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि जापान को भारत की आर्थिक स्थिरता और विकास क्षमता पर पूरा विश्वास है।
दरअसल, जापान और भारत ने 2026 तक 5 ट्रिलियन येन के सार्वजनिक और निजी निवेश का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह लक्ष्य 2025 में ही हासिल हो गया। इसी सफलता को देखते हुए यह लक्ष्य अब दोगुना कर दिया गया है।
यह बढ़ा हुआ निवेश न केवल भारत-जापान के बीच विश्वास को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति को भी प्रमाणित करता है।
ऑस्ट्रेलिया ने ट्रंप के बयान से असहमति जताई
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को “मृत” कहे जाने पर ऑस्ट्रेलिया ने सहमति नहीं जताई। इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलिया ने भारत को असीम संभावनाओं वाला देश बताया और व्यापारिक साझेदारी को मज़बूत करने की इच्छा जताई।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया ने ट्रंप की टैरिफ नीति (शुल्क आधारित व्यापार नीति) का समर्थन भी नहीं किया। यह साफ संकेत है कि भारत को विश्व के प्रमुख देश सकारात्मक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
चीन से भी मिले सकारात्मक संकेत
भारत की विदेश नीति की सफलता यहीं तक सीमित नहीं रही। हाल ही में चीन में प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत हुआ, जहाँ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ बेहतर संबंध बनाने, व्यापार को बढ़ाने और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने पर सहमति जताई।
एक नए युग की शुरुआत
भारत की सशक्त विदेश नीति अब वैश्विक स्तर पर प्रभाव छोड़ रही है। साझेदार देशों का भरोसा, बढ़ता निवेश, और रणनीतिक सहयोग यह संकेत देते हैं कि भारत की वैश्विक स्थिति पहले से कहीं अधिक सशक्त हो चुकी है। यह आर्थिक और कूटनीतिक रूप से भारत के उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है।
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