टोक्यो बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज टोक्यो में आयोजित एक महत्वपूर्ण बिजनेस फोरम को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने भारत-जापान आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए पाँच प्रमुख क्षेत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने जापान की व्यापारिक बिरादरी के साथ मुलाकात कर भारत में निवेश के अवसरों पर चर्चा की और आपसी सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से मारुति सुजुकी सहित जापानी कंपनियों द्वारा भारत में किए गए निवेश की सराहना की।

प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए पाँच प्रमुख सहयोग क्षेत्र:
1. मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा उत्पादन

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान की ऑटोमोबाइल सेक्टर में पुरानी और सफल साझेदारी रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यही मॉडल रोबोटिक्स, शिपबिल्डिंग, बैटरी, सेमीकंडक्टर और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जापानी कंपनियों ने भारत में अब तक 40 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसमें से 75% कंपनियां लाभ में हैं। भारत में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ पारदर्शी नीतियों के कारण आज निवेश के लिए अनुकूल माहौल बना है।

2. तकनीक और नवाचार

प्रधानमंत्री ने भारत और जापान की तकनीकी क्षमताओं पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जापान एक तकनीकी महाशक्ति है और भारत प्रतिभा की महाशक्ति है। दोनों देशों के सहयोग से तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है।

3. ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और 2044 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि भारत और जापान मिलकर सोलर पावर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में मिलकर वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में योगदान कर सकते हैं।

4. अगली पीढ़ी का इंफ्रास्ट्रक्चर

प्रधानमंत्री ने भारत में तेजी से विकसित होते नेक्स्ट-जेनरेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर पर प्रकाश डाला। उन्होंने जापान के सहयोग से बन रही बुलेट ट्रेन परियोजना, मेट्रो नेटवर्क, और हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत में स्मार्ट मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।

5. कौशल विकास

प्रधानमंत्री ने भारत के विशाल युवा और स्किल्ड वर्कफोर्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा का मिलन वैश्विक विकास को एक स्मार्ट और रणनीतिक दिशा प्रदान कर सकता है।

 


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