आजकल हर जगह — अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और जागरूकता अभियानों में — एक ही बात पर ज़ोर दिया जाता है कि “बच्चे को जन्म से 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए।”
लेकिन बहुत से माता-पिता के मन में सवाल रहता है कि पानी, शहद, मिश्री पानी या अन्य चीजें क्यों नहीं दी जा सकतीं? आइए जानते हैं इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण।

1. मां के दूध में है पूरा पोषण
मां का दूध बच्चे के लिए प्रकृति का सबसे उत्तम आहार है। इसमें प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज सहित सभी आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चे की वृद्धि और विकास के लिए जरूरी हैं। इसका कोई विकल्प नहीं है।
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
मां के दूध में एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा कोशिकाएं होती हैं जो बच्चे को संक्रमण, दस्त, सर्दी-खांसी और निमोनिया से बचाती हैं। यह बच्चे की इम्यूनिटी मजबूत बनाता है — जो किसी बाहर की चीज़ से संभव नहीं।
3. बच्चे का पेट बहुत छोटा होता है
नवजात बच्चे का पेट बहुत छोटा होता है — जन्म के समय लगभग चेरी के आकार का। अगर आप उसे दो चम्मच पानी भी दे देंगे तो उसका पेट भर जाएगा और वह मां का दूध नहीं पी पाएगा। इससे उसका जरूरी पोषण छूट जाएगा।

4. मां के दूध में पहले से ही 90% पानी होता है
कई बार माता-पिता सोचते हैं कि बच्चे को प्यास लगेगी, लेकिन मां के दूध में 90% पानी होता है। इससे बच्चा पूरी तरह हाइड्रेटेड रहता है। बाकी 10% में वे सारे पोषक तत्व होते हैं जो उसके विकास के लिए जरूरी हैं।
5. बाहर की चीजों से संक्रमण का खतरा
पानी, शहद या मिश्री पानी जैसी चीजें देने से संक्रमण या एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है, क्योंकि इनसे बैक्टीरिया शरीर में जा सकते हैं। सिर्फ मां का दूध देने से बच्चा सुरक्षित रहता है और स्वच्छ, प्राकृतिक पोषण प्राप्त करता है।
निष्कर्ष
मां का दूध सिर्फ आहार नहीं बल्कि बच्चे के लिए संपूर्ण सुरक्षा कवच है।
जन्म से 6 माह तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध दें — ना पानी, ना शहद, ना कोई और चीज़।
क्योंकि मां के दूध में है — पोषण, प्रतिरक्षा और अपार ममता।
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