Vodafone Idea AGR Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा – 9,450 करोड़ की मांग पर अब अंतिम फैसला जरूरी

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सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन-आइडिया की याचिका पर केंद्र सरकार से कहा है कि AGR बकाया मामले में ₹9,450 करोड़ की नई मांग पर अब अंतिम निर्णय होना चाहिए। दूरसंचार विभाग (DoT) की इस नई मांग को कंपनी ने गलत आंकड़ों और डुप्लीकेशन पर आधारित बताया है। सरकार ने कोर्ट से समय मांगा क्योंकि उसके पास कंपनी में 49% हिस्सेदारी है। पढ़ें वोडाफोन-आइडिया AGR केस की पूरी जानकारी हिंदी में –

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा कि वोडाफोन-आइडिया (Vi) की उस याचिका पर “अंतिम निर्णय” होना चाहिए, जिसमें कंपनी पर समायोजित सकल राजस्व (AGR) बकाया के रूप में 9,450 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग को चुनौती दी गई है। इस बीच केंद्र सरकार ने कोर्ट से कुछ समय और मांगा ताकि कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को देखते हुए संभावित समाधान निकाला जा सके।

मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजरिया भी शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा –

“इन कार्यवाहियों पर अब किसी न किसी तरह अंतिम नतीजा निकलना चाहिए।”

यह टिप्पणी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से की गई, जो केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए थे।

वोडाफोन-आइडिया की दलील

वोडाफोन-आइडिया ने इस महीने की शुरुआत में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया है कि दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से की गई नई ₹9,450 करोड़ की मांग सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए AGR देनदारियों से जुड़े फैसले के दायरे से बाहर है।

कंपनी का तर्क है कि यह नई मांग अनुचित है और इसमें कई त्रुटियाँ हैं। उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2018–19 के लिए DoT ने ₹2,774 करोड़ की अतिरिक्त मांग की है, जिसे कंपनी डुप्लीकेशन और गलत आँकड़ों पर आधारित मानती है और इसके लिए नए सिरे से समायोजन की जरूरत बताती है।

इसके अलावा, DoT ने वित्त वर्ष 2017 और 2019 से जुड़े लाइसेंस शुल्क और AGR बकाया का पुनर्गणना भी की है, जिसे कंपनी पूरे बकाये की दोबारा समीक्षा (recalculation) की मांग का आधार बना रही है।

सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल  ने कंपनी की दलीलों का सीधा विरोध करने से बचते हुए अदालत से समय मांगा। उन्होंने कहा –

“मैं अदालत को यह भी बताना चाहता हूँ कि भारत सरकार के पास कंपनी में 49% इक्विटी है, इसलिए सरकार भी इस मसले की प्रत्यक्ष हितधारक है।”

आगे की कार्यवाही

वरिष्ठ अधिवक्ता , जो वोडाफोन-आइडिया की ओर से पेश हुए, ने केंद्र सरकार के समय मांगने के अनुरोध का विरोध नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी की नई याचिका पूरी तरह से ताज़ा मांगों से संबंधित है और पहले से बकाया AGR देनदारियों से इसका कोई टकराव नहीं है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते के लिए सूचीबद्ध कर दी है।


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