दुर्गा पूजा में प्रतिदिन होने वाली देवी मां की संध्या आरती

दुर्गा पूजा में मां भगवती की आराधना की जाती है जिसमें 10 दिनों की पूजा होती है। कलश स्थापना करने वाले सभी भक्तजन संध्या काल में इस आरती को अवश्य करें :


श्रीदेवीजीकी आरती

(मा! जगजननी जय। ज जगजननी जय। जय !! भयहारिणि, भवतारिणि, भवभामिनि जय! जय !!

तू ही सत-चित-सुखमय शुद्ध ब्रह्मरूपा।

सत्य सनातन सुन्दर पर-शिव सुर-भूषा ॥ १ ॥ मां जगजननी जय जय

आदि अनादि अनामय अविचल अविनाशी।

अमल अनन्त अगोचर अज आनंदराशी ॥ २ ॥
मां जगजननी जय जय

अविकारी, अघहारी, अकल, कलाधारी।

कर्त्ता विधि, भर्त्ता हरि, हर संहारकारी ॥ ३ ॥
मां जगजननी जय जय
तू विधिवधू, रमा, तू उपा, महामाया।

जाया ॥ ४ ॥ मूल प्रकृति विद्या तू, तू जननी,

व्रजरानी राधा। राम, कृष्ण तू, सीता,

तू वांछाकल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा ॥ ५ ॥ ज०

दश दुर्गा, नानाशस्त्रकरा। विद्या, नव

धरा ॥ ६ ॥ ज अष्टमातृका, योगिनि, नव नव रूप

तू परधामनिवासिनि, महाविलासिनि तू।

जग०



तू ही श्मशानविहारिणि, ताण्डवलासिनि तू ॥ ७ ॥

सुर-मुनि-मोहिनि सौम्या तू शोभाऽऽधारा।

धारा ॥ ८ ॥ ज विवसन विकट-सरूपा, प्रलयमयी

गरलमना। तू ही स्नेह-सुधामयि, तू अति

रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि-तना ॥ ९ ॥ जग ०

मूलाधारनिवासिनि, इह-पर-सिद्धिप्रदे।

कालातीता काली, कमला तू वरदे ॥ १०॥ जग०

शक्ति शक्तिधर तू ही नित्य अभेदमयी।

भेदप्रदर्शिनि वाणी विमले ! वेदत्रयी ॥ ११ ॥ जग०

हम अति दीन दुखी मा! विपत-जाल घेरे।

हैं कपूत अति कपटी,पर बालक तेरे ॥ १२ ॥ जग ०

निज स्वभाववश जननी ! दयादृष्टि कीजै।

करुणा कर करुणामयि ! चरण-शरण दीजै
मां जगजननी जय जय


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