नृत्य क्यों सीखना चाहिए? — सिर्फ कला नहीं, जीवन जीने की कला

शास्त्रीय नृत्य हो या आधुनिक नृत्य—नृत्य सीखने की आवश्यकता पर विचार करना आज के समय में अत्यंत आवश्यक हो गया है। अक्सर नृत्य को केवल…

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नृत्य-संगीत प्रदर्शन का मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव

नृत्य का मनोवैज्ञानिक प्रभाव, संगीत थेरेपी, classical dance benefits, भावनात्मक प्रभाव, Indian classical music psychology, कला और मानसिक स्वास्थ्य परिचय नृत्य-संगीत केवल मनोरंजन नहीं है…

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कथक में पुरुषों की भूमिका और सामाजिक पहचान : नृत्य की दुनिया में लैंगिक संतुलन की यात्रा

भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपरा में कथक एक अत्यंत अभिव्यक्तिपूर्ण और भावनात्मक नृत्य शैली है। इतिहास के पन्ने पलटें तो पाएंगे कि आरंभ में यह…

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Lavanda Nach”  – पुरुष द्वारा महिला पात्र निभाने (“cross-gender roles”) की भूमिका और स्थिति

लौंडा नाच बिहार की एक ऐसी पुरानी नृत्य परंपरा है जिसे उस समय की सामाजिक परिस्थिति ने उत्पन्न किया है । स्व भिखारी ठाकुर जी…

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