हर उम्र में बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य: माता-पिता के लिए जरूरी मार्गदर्शन
अगर आप माता-पिता हैं और आपका बच्चा स्कूल या कॉलेज में पढ़ता है, तो यह जानना बहुत जरूरी है कि जीवन के किस दौर में उन्हें आपकी खास देखभाल की जरूरत होती है। हम अक्सर सोचते हैं कि बच्चे अभी छोटे हैं, खेलते-खेलते सब सीख जाएंगे या अच्छा खाना खिलाने से वे मानसिक रूप से हमेशा स्वस्थ रहेंगे। लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है।

10 से 11 साल की उम्र में भी बच्चों के दिमागी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं देखी जा सकती हैं, जिनका पता माता-पिता को नहीं चल पाता। आज के सोशल मीडिया के दौर में बच्चे बहुत जल्दी बड़ी-बड़ी चीजों से रूबरू हो जाते हैं। जो बातें पहले 14-15 साल की उम्र में समझ आती थीं, अब बच्चे 11-12 साल में ही जान जाते हैं, क्योंकि सब कुछ उनके मोबाइल स्क्रीन पर मौजूद होता है।
ऐसे में माता-पिता को लगातार संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनसे प्यार से बातें करें, उनके मन की बात समझने की कोशिश करें। किसी भी बात पर उन पर गुस्सा न करें। बच्चा तभी अपने मन की बात आपसे साझा करेगा जब उसे भरोसा होगा कि आप उसकी बात को गंभीरता से सुनेंगे।
अगर किसी वजह से बच्चे के मन में कोई नकारात्मक विचार या गलत सोच घर कर गई है, तो उसे भी बातचीत के ज़रिए सुधारा जा सकता है — बशर्ते आप उसे विश्वास में लें।
अगर आपका बच्चा कॉलेज में पढ़ता है और घर से दूर रहता है, तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि आप हर महीने कुछ दिन उसके साथ बिताएं। क्योंकि जब तक आपको उसके अकेलेपन या मानसिक दबाव का एहसास होगा, तब तक स्थिति बिगड़ सकती है।

कॉलेज के बच्चे अक्सर यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि उनका करियर कहीं जा नहीं रहा या वे पर्याप्त सक्षम नहीं हैं, जबकि वे प्रतिभाशाली होते हैं। ऐसे में माता-पिता अगर लगातार संपर्क में रहें, उनका हौसला बढ़ाते रहें, तो बच्चा अपने प्रयास से शानदार करियर विकल्प चुन सकता है।
उन्हें करियर चुनने की आज़ादी दें, दोस्तों से मिलने-जुलने की, ट्रिप पर जाने की स्वतंत्रता दें। यह नहीं कि आप पूरी तरह लगाम छोड़ दें, लेकिन उनकी चाहतों की कद्र करें। जब आप उनके निर्णयों का सम्मान करेंगे, तो वे भी आपके और करीब आएंगे और सही दिशा पकड़ने में सफल होंगे।

अत्यधिक पाबंदियां बच्चों को झूठ बोलने या छिपकर काम करने के लिए मजबूर कर देती हैं, जिससे उनका मानसिक तनाव बढ़ता है और गलत रास्ते पर जाने की संभावना भी बढ़ जाती है।
अगर इन सबके बाद भी बच्चे में एंजाइटी, तनाव या दबाव कम न हो, तो किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक की सहायता लेने से बिल्कुल न हिचकें। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना।
https://www.elloramindcare.comhttps://youtu.be/XduJC5-rX_0?si=B6g1P9x7bOL3r9dV
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