IndiGo का बड़ा कदम: विंटर शेड्यूल में 10% कटौती के बाद 700 से ज्यादा एयरपोर्ट स्लॉट छोड़े

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भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo को विंटर फ्लाइट प्रोग्राम में 10% कटौती का खामियाजा भुगतना पड़ा है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के निर्देश के बाद एयरलाइन ने देश के विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों पर 700 से अधिक स्लॉट सरेंडर कर दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अन्य एयरलाइनों को इन खाली स्लॉट्स पर उड़ान संचालन के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर की शुरुआत में DGCA ने IndiGo के विंटर शेड्यूल में कटौती का आदेश दिया था। इसका कारण था—

बार-बार अचानक उड़ान रद्द होना

बड़े पैमाने पर फ्लाइट डिले

यात्रियों में बढ़ता असंतोष

दिसंबर 2025 में हालात इतने बिगड़े कि केवल 3 से 5 दिसंबर के बीच 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 फ्लाइट्स में देरी हुई, जिससे देशभर में 3 लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए।

एयरपोर्ट स्लॉट क्या होते हैं?

एयरपोर्ट स्लॉट दरअसल निर्धारित समय खिड़कियां होती हैं, जिनमें किसी एयरलाइन को टेक-ऑफ या लैंडिंग की अनुमति मिलती है। व्यस्त एयरपोर्ट्स पर ये स्लॉट बेहद अहम होते हैं क्योंकि इन्हीं से फ्लाइट टाइमिंग,नेटवर्क प्लानिंग,ऑपरेशनल एफिशिएंसी तय होती है।

Q1 2026 तक असर
IndiGo द्वारा छोड़े गए ये स्लॉट 2026 की पहली तिमाही (Q1) से जुड़े हैं। आमतौर पर रोज़ाना करीब 2,200 उड़ानों का संचालन करने वाली IndiGo को दिसंबर में आई ऑपरेशनल अस्थिरता के बाद मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा।

सरकार का रुख: स्लॉट खाली नहीं रहेंगे


नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने साफ किया है कि ये स्लॉट खाली नहीं रहने दिए जाएंगे।
हालांकि, स्लॉट उन्हीं एयरलाइनों को मिलेंगे जो यह साबित कर सकें कि उनके पास—

अतिरिक्त विमान, प्रशिक्षित पायलट और क्रू,ग्राउंड हैंडलिंग उपकरण , तकनीकी इंजीनियर मौजूद हैं। केवल मौजूदा रूट्स को इधर-उधर करने वाली एयरलाइनों को प्राथमिकता नहीं मिलेगी।

महत्वपूर्ण शर्तें:

ऑपरेशनल तैयारी का सबूत देना अनिवार्य

मौजूदा रूट्स या कनेक्टिविटी में कटौती नहीं की जा सकती

नियमों का उल्लंघन होने पर स्लॉट वापस ले लिए जाएंगे

महत्वपूर्ण शर्तें:

ऑपरेशनल तैयारी का सबूत देना अनिवार्य

मौजूदा रूट्स या कनेक्टिविटी में कटौती नहीं की जा सकती

नियमों का उल्लंघन होने पर स्लॉट वापस ले लिए जाएंगे

निष्कर्ष
DGCA का यह सख्त कदम भारतीय एविएशन सेक्टर में अनुशासन और स्थिरता लाने की कोशिश का हिस्सा है। यात्रियों की सुविधा और भरोसा बहाल करना फिलहाल रेगुलेटर की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सी एयरलाइंस IndiGo के छोड़े गए स्लॉट्स का फायदा उठाती हैं और इसका घरेलू हवाई यात्रा पर क्या असर पड़ता है।


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