
शास्त्रीय नृत्य हो या आधुनिक नृत्य—नृत्य सीखने की आवश्यकता पर विचार करना आज के समय में अत्यंत आवश्यक हो गया है। अक्सर नृत्य को केवल मनोरंजन या रोजगार का साधन मान लिया जाता है, लेकिन क्या नृत्य वास्तव में सिर्फ इतना ही है?
या फिर नृत्य अपने भीतर ऐसी विशेष क्षमताएँ और गहराई समेटे हुए है, जो मनुष्य के जीवन को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहतर बना सकती हैं?

या फिर नृत्य अपने भीतर ऐसी विशेष क्षमताएँ और गहराई समेटे हुए है, जो मनुष्य के जीवन को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहतर बना सकती हैं?
यदि ऐसा है, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या नृत्य हर व्यक्ति को सीखना चाहिए?
आइए, इस पर गहराई से मंथन करते हैं।
नृत्य का वास्तविक अर्थ

नृत्य की परिभाषा ही अपने आप में अत्यंत सुंदर है। जब मनुष्य खुशी, उल्लास और भावनाओं से भरकर अपने अंगों के माध्यम से अभिव्यक्ति करता है, वही नृत्य कहलाता है।
जब नृत्य जीवन से इतनी गहराई से जुड़ा है, तो फिर इसे अपनाने में संकोच क्यों?
नृत्य: स्वास्थ्य और मानसिक शांति का माध्यम
नृत्य एक संपूर्ण शारीरिक व्यायाम है। यह हृदय को स्वस्थ रखता है, मांसपेशियों को सक्रिय बनाता है और शरीर में लचीलापन बनाए रखता है।
सामान्य वर्कआउट के विपरीत, नृत्य करते समय मन भी प्रसन्न रहता है। इससे शरीर में डोपामिन, सेरोटोनिन और एंडॉर्फिन जैसे “हैप्पी हार्मोन” का स्राव होता है, जो तनाव कम करने और मानसिक शांति देने में सहायक होते हैं।
शरीर और मस्तिष्क का यह सकारात्मक विकास रोगों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है।
संस्कृति, संस्कार और व्यक्तित्व विकास

शास्त्रीय नृत्य हमें हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति से जोड़ता है और हमें सुसंस्कृत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नृत्य एक दृश्य कला होने के कारण हमारे भीतर छुपी रचनात्मक प्रतिभा को बाहर लाता है। इससे व्यक्ति अधिक प्रभावशाली, आत्मविश्वासी और मिलनसार बनता है।
रोज़गार और सम्मान का साधन
नृत्य न केवल आत्मसंतोष देता है, बल्कि एक सम्मानजनक आजीविका का माध्यम भी बन सकता है। एक कलाकार, गुरु या कोरियोग्राफर के रूप में समाज में पहचान मिलती है।
शिष्य-शिष्याओं के साथ जुड़ाव कलाकार को सदैव ऊर्जावान और प्रेरित बनाए रखता है।
यौवन और लचीलापन बनाए रखने में सहायक
नियमित नृत्य शरीर को जल्दी बूढ़ा नहीं होने देता। यह जोड़ों को लचीला रखता है, संतुलन सुधारता है और उम्र बढ़ने के प्रभाव को धीमा करता है।
नृत्य केवल कला नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन की कुंजी है।
इसलिए नृत्य सिर्फ मंच के कलाकारों के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।
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