लैब?ग्रोन गोल्ड: क्या सोना अब प्रयोगशाला में तैयार होगा
सोना (Gold) भारत में सिर्फ एक धातु नहीं है, बल्कि यह समृद्धि, आभूषण और निवेश का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, हर मौके पर सोने की चमक भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है।

क्या अब लैब में बनने जा रहा है? यह तो नेचुरल मेटल है न? तो अब ये लैब में बनेगा? क्या इससे सोना का भाव गिर जाएगा? क्या अब गोल्ड में इन्वेस्टमेंट बंद कर देना चाहिए?
क्या आपके मन में भी ऐसे सवाल आ रहे हैं? आप भी गोल्ड इन्वेस्टमेंट को लेकर पैनिक हो रहे हैं?
अगर आपका जवाब हां है तो कृपया यह लेख पूरा पढ़ें।

लैब में गोल्ड बनाने का दावा
अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक स्टार्टअप ने यह दावा किया है कि वह लैब में सोना तैयार कर सकता है। इसके लिए एक फ्यूजन रिएक्शन प्रोसेस का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में mercury-198 को हाई-एनर्जी न्यूट्रॉन से बमबारी की जाती है।
इसके बाद यह mercury-197 में बदल जाता है।

बाद में यह डिके होकर गोल्ड के आइसोटोप में परिवर्तित हो जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरीके से एक साल में लगभग 5000 किलोग्राम सोना तैयार किया जा सकता है।

चुनौतियाँ और सीमाएँ
भले ही यह सुनने में आकर्षक लगे, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियाँ जुड़ी हैं:
यह सोना 17-18 साल तक रेडियोएक्टिव रहेगा। यानी इसे तुरंत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
इसे बनाने वाली मशीन को तैयार होने में ही 15 साल लग सकते हैं।
इसकी लागत क्या होगी और क्या यह प्राकृतिक सोने (Natural Gold) को नुकसान पहुंचाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
इतिहास भी बताता है कि लैब में तैयार हीरे (Lab Grown Diamonds) ने प्राकृतिक हीरे के बाजार को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं किया।
निवेशकों के लिए संदेश
सरकार ने अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है।
घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
सबसे बेहतर है कि अपने निवेश पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाइड रखें और बाजार के स्वाभाविक उतार-चढ़ाव में धैर्य बनाए रखें।
निष्कर्ष
लैब ग्रोन गोल्ड पर रिसर्च जरूर हो रही है, लेकिन यह अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए पैनिक होने की बजाय समझदारी से फैसले लेना ही सबसे सही रणनीति है। सोना, चाहे प्राकृतिक हो या लैब में बना, उसकी चमक भारतीयों के लिए कभी कम नहीं होगी।
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