पटना सरस मेला 2025: गांधी मैदान में लोककला, स्वाद और संस्कृति का अद्भुत संगम

क्या आपने पटना का सरस मेला देखा है?

अगर नहीं, तो सच मानिए आपने कुछ खास नहीं देखा। पटना के गांधी मैदान में हर वर्ष लगने वाला सरस मेला न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। यह मेला ग्रामीण संस्कृति, हस्तशिल्प, स्वदेशी उत्पाद और महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है।

हर साल क्यों खास होता है पटना का सरस मेला?

पटना के गांधी मैदान में हर वर्ष सरस मेला आयोजित किया जाता है, जहां देशभर से स्वयं सहायता समूह और कारीगर अपने उत्पाद लेकर पहुंचते हैं। इस मेले में खास तौर पर जीविका समूह द्वारा बनाई गई वस्तुएं लोगों को खूब आकर्षित करती हैं।
यह मेला न केवल खरीदारी का केंद्र है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी मंच भी है।

जीविका दीदी और किसान चाची के उत्पाद
पटना सरस मेले की सबसे बड़ी पहचान हैं जीविका दीदी के उत्पाद। यहां आचार, पापड़, अगरबत्ती, मसाले और हस्तनिर्मित सजावटी सामान बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं।
इसके साथ ही किसान चाची ब्रांड के आचार और आकर्षक फ्लेक्स भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। बढ़ती भीड़ और लोगों की मांग को देखते हुए इस बार मेला एक सप्ताह और बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

लाह की चूड़ियां: लाइव कारीगरी का अनुभव

इस बार के सरस मेले की सबसे खास और आकर्षक चीज है — लाह की चूड़ियां बनते हुए देखना।
कारीगर आग की भट्ठी के सामने बैठकर लाह के गुच्छों को गर्म करते हैं और मिनटों में खूबसूरत चूड़ियां बनाकर तैयार कर देते हैं। यह नजारा खासकर लड़कियों और महिलाओं के लिए बेहद आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
जहां पुराने लोग इस कला को पहले देख चुके हैं, वहीं बड़े शहरों में पढ़ाई कर रहे युवा लड़के-लड़कियों के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया और रोमांचक है।

सरस मेला और महिला सशक्तिकरण

सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, सरस मेला जैसे आयोजनों से हजारों ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं सीधे ग्राहकों से जुड़कर अपने उत्पाद बेचती हैं, जिससे उनकी आय बढ़ती है और पारंपरिक कला को नया जीवन मिलता है।

इस बार का बदला हुआ और क्लासी लुक
अगर आप पहले सरस मेला गए हैं, तो इस बार आपको एक बड़ा बदलाव जरूर दिखेगा। पूरे गांधी मैदान में हरे रंग की कालीन/दरी बिछाई गई है, जिससे धूल की समस्या काफी कम हो गई है। यह मेला इस बार पहले से ज्यादा साफ, व्यवस्थित और क्लासी नजर आ रहा है।

क्यों जरूर जाएं पटना सरस मेला?

मजा करने की कोई एक परिभाषा नहीं होती। किसी के लिए खरीदारी, किसी के लिए लोककला और किसी के लिए बस माहौल ही काफी होता है।
अगर आप अब तक पटना का सरस मेला नहीं गए हैं, तो इस बार जरूर जाएं। यह अनुभव न सिर्फ मनोरंजन देगा, बल्कि आपको बिहार की असली संस्कृति से भी रूबरू कराएगा।


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